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लद्दाख के दूसरी ओर चीन के तीन एयरबेस पर तैनाती बढ़ी

नई दिल्ली. भारतीय वायु सेना लगातार अपने को एक ऐसी स्थिति के लिए तैयार कर रही है जिसमें भारत के दोनों पड़ोसी और एक-दूसरे के ऑल वेदर फ्रेंड चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ रहे सामरिक रिश्ते का चुनौती बनना शामिल है.कैसे चीनी पीएलए और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी के हेडक्वाटर में पाक सैन्य अधिकारियों की तैनाती और पिछले कुछ सालों में इसमें बढ़ोतरी हुई है.

चीन-पाकिस्तान की इस मिलीभगत और टू फ्रंट वॉर की संभावना पर वायुसेना प्रमुख ने कहा है कि वैसे तो उनकी पार्टनरशिप से चिंता की कोई बात नहीं है, लेकिन जो वेस्टर्न टेक्नॉलजी चीन को पाकिस्तान के जरिए मिल रही है, उसे गंभीरता से देखना होगा. एयर चीफ़ मार्शल वी आर चौधरी ने कहा कि हम टू फ्रंट वॉर से निपटने में सक्षम हैं.

वायु सेना प्रमुख ने एलएसी पर चीन की बढ़ती सैन्य तैनाती को भी जगज़ाहिर कर दिया. उन्होंने साफ़ कहा कि तिब्बत में तीन एयरबेस पर चीन की तैनाती बढ़ी है. एलएसी पर चीन अपने इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट की वजह से फॉरवर्ड एरिया में तेजी से तैनाती कर सकता है. हालांकि वायु सेना प्रमुख ने ये भी साफ़ किया कि एयरफोर्स के एयर ऑपरेशंस में कोई फर्क नहीं पड़ेग
उधर अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत सरकार ने वायुसेना के लिए रूस से S-400 एयर डिफ़ेंस सिस्टम की खरीद प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ाया और अब एस-400 भारतीय वायुसेना में शामिल होने को तैयार है. वायु सेना प्रमुख ने इस बात का भी ऐलान कर दिया कि इसी साल में भारत को एस-400 की पहली यूनिट मिल जाएगी.

भारतीय वायुसेना लगातार आधुनिकता के दौर से गुजर रही है. उसी कड़ी में इस बात की भी कोशिश की जा रही है कि टू फ़्रंट वॉर की भविष्य की संभावनाओं के चलते फाइटर स्क्वाड्रन की कमी को जल्द-से-जल्द पूरा किया जाए. फ़िलहाल भारत को 42 फ़ाइटर स्क्वाड्रन की ज़रूरत है, लेकिन वायु सेनाध्यक्ष ने ये साफ़ कर दिया कि अगले 10 से 15 साल के भीतर भी भारतीय वायुसेना के पास 42 फ़ाइटर स्क्वाड्रन नहीं होने वाले.

 

हां, एक दशक यानी अगले 10 साल में भारतीय वायुसेना के पास 83 लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट से 4 स्क्वाड्रन एलसीए मार्क वन ए की बनेंगी, 6 से 7 स्क्वाड्रन एडवांस मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट की बनेंगी, 6 स्क्वाड्रन मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की बनेंगी, लेकिन इसी दौरान मिग-21, जैगुआर और मिग-29 के चार स्क्वॉड्रन फेज आउट होने वाले हैं.

ऐसे में भारतीय वायुसेना के पास कुल 35 फ़ाइटर कुल ज़रूर हो जाएंगे. चूँकि एयरक्राफ्ट की खरीद की प्रक्रिया जितनी जटिल है उतनी ही लंबी भी. जानकारों की माने, तो पहले तो जिस दिन विमानों की प्रक्रिया शुरू होती है और जब तक पहला विमान आता है उसमें साल तक का वक्त लग जाता था, लेकिन भारत सरकार इस कोशिश में है कि ये समय कम हो जाए.

 

जम्मू के एयरफ़ोर्स स्टेशन पर ड्रोन के ज़रिए हुए हमले की कोशिश के बाद सभी एजेंसियां एंटी ड्रोन तकनीक पर ज़ोर दे रही हैं. सरकार की तरफ़ से तो बाक़ायदा ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइन तक जारी की गई है. भारतीय वायुसेना प्रमुख का कहना है कि पाकिस्तान के ड्रोन हमले की नई साज़िश का तोड़ भी अब स्वदेशी ही निकालने जा रही है.

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