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आतंकवाद बाघ है, पालने वाले को भी खा जाता है..चीन

नई दिल्ली : भारत हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ रहा है और पूरी दुनिया को इससे लड़ने के लिए एकजुट होने के लिए कहता रहा है. चीन को कभी भी भारत की बात नहीं समझ में आई लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान के काबिज होते ही अब आतंकवाद पर चीन के सुर भी बदलने लगे हैं. ग्लोबल काउंटर टेररिज्म फोरम की 11वीं बैठक में चीन का आतंकवाद पर बदला हुआ चेहरा नजर आया.

फोरम में शामिल चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दुनिया से आतंकवाद पर दोहरा मापदंड छोड़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि आतंकवाद वाद का सिर्फ एक ही रूप है आतंक. इसे अच्छे और बुरे में बांटा नहीं जा सकता. उन्होंने इसकी तुलना खूंखार जानवर बाघ से कर डाली. वांग यी ने कहा कि आतंकवाद एक बाघ की तरह है जो पालने वाले को भी खा डालता है.

फिलहाल वांग यी ने अपनी इस बात में न तो पाकिस्तान का नाम लिया और न ही अफगानिस्तान का नाम लिया. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो उनका इशारा इन्हीं दोनो देशों की तरफ था. उन्होंने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चुनौती है. इतना ही नहीं वांग यी ने आंतकवाद के खिलाफ दुनिया के तमाम देशों के प्रयासों की तारीफ भी की.

चीन के विदेश मंत्री ने बैठक में उन कारकों के बारे में भी बताया जिससे आतंकवाद अपने दायरे को बढ़ा रहा है. उन्होंन कहा कि आतंकी संगठन विज्ञान का प्रयोग तेजी से कर रहे हैं. वे अपने नेटवर्क को मजबूत और बढ़ाने के लिए सोशल नेटवर्क, वर्चुअल करेंसी और ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर रहे हैं. उन्होंन यह भी कहा कि दुनिया में कोरोना महामारी के प्रकोप की वजह से आतंकवाद के खिलाफ उठाए जाने वाले प्रयासों में काफी कमजोरी आई है.

आतंकवाद पर अपने बयान पर चीन ने अमेरिका पर भी निशाना साधा. विदेश मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान से अफगान युद्ध और आज के हालात से यह साफ होता है कि अकेले सैन्य साधन के बल पर आतंकवाद का खात्मा नहीं किया जा सकता.

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