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आखिर लखीमपुर खीरी में कहां से आए सिख किसानर?

लखीमपुर : पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में हुई हिंसा के बाद से यह जिला सुर्खियों में बना हुआ है. यहां के तिकुनिया गांव के पास चार सिख किसानों को कथित तौर पर गाड़ियों से कुचलकर मार दिया गया था. इसके बाद की हिंसा में चार अन्य लोग भी मारे गए थे. इस घटना ने यूपी के सिख समुदाय को सुर्खियों में ला दिया है. इस बीच भाजपा से नाराज चल रहे उसके सांसद वरुण गांधी ने कहा है कि इलाके में इस मामले को सिख बनाम हिंदू रंग देने की कोशिश की जा रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस पूरे इलाके में सिख समुदाय कोई राजनीतिक ताकत है?

दरअसल, लखीमपुर जिला यूपी के उस तराई इलाके का हिस्सा है जहां आजादी के बाद पूरे इलाके में जंगल थे. तराई का पूरा इलाका नेपाल से सटता है. यहां से हिमालय की शुरुआत होती है. यह पूरा इलाका विरान पड़ा था. यहां बहुत कम आबादी थी.

देश के बंटवारे के वक्त पाकिस्तान से विस्थापित हुए सिख समुदाय के लोगों को भारत सरकार ने इसी इलाके में जमीनें देकर बसाया था. उस वक्त हजारों सिख परिवारों को यहां जमीनें दी गई और समुदाय के लोगों ने कड़ी मेहनत कर बंजर पड़ीं इन जमीनों को आबाद किया.

कुछ ही समय में इस समुदाय ने इस इलाके को हराभरा कर दिया. इसके बाद इन किसानों के संपर्क में पंजाब के उनके रिश्तेदार और अन्य लोग आए. इस इलाके में जमीनें सस्ती होने की वजह से पंजाब से बड़ी संख्या में अन्य किसान भी यहां चले आए. इस तरह 1960-70 के दशक में पंजाब से अच्छी-खासी संख्या में किसान यूपी के इस इलाके में आकर बस गए.

तराई के पांच जिलों लखीमपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बिजनौर और रामपुर में सबसे ज्यादा सिख हैं. ये सभी बंटवारे के वक्त और बाद के दिनों में पंजाब से यहां आकर बसे. उत्तराखंड का उधमसिंह पुर जिला इस पूरे इलाके में सिखों का गढ़ माना जाता है. ये समुदाय अपनी कड़ी मेहनत से इस पूरे इलाके में खेती-किसानी में अपनी एक खास पहचान बनाई थी.

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में सिख समुदाय की कुल आबादी करीब साढ़े छह लाख है. इनमें वे सिख भी शामिल हैं जो राज्य के बड़े शहरों जैसे कानपुर, आगरा के मूल निवासी हैं. एक अनुमान के मुताबिक यूपी के तराई इलाके में करीब पांच सिख हैं. तराई इलाके के अधिकतर सिख आबादी गांवों में रहती है और वे पंजाब-हरियाणा की तरह गेहूं-धान जैसी फसल उपजाती हैं.
क्षेत्रफल के हिसाब से लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है. इसका कुल क्षेत्रफल 7680 वर्ग किमी है. यह लखनऊ से करीब 130 किमी दूर है. यह जिला लखनऊ प्रशासन के अंतर्गत ही आता है. यहीं सबसे ज्यादा सिख आबादी रहती है.

प्राकृतिक संसाधन यानी पानी की भरपूर उपलब्धता की वजह से यह जिला यूपी की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है. कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन और वानिकी में यह जिला काफी आगे है. इसी जिले में उत्तर प्रदेश का एक मात्र नेशनल पार्क दुधवा भी है.

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लखीमपुर में करीब 95 हजार सिख आबादी है. संख्याबल के हिसाब से सिख यहां भी कोई बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं हैं लेकिन खेखी-किसानी और अर्थव्यवस्था में उनका बहुत बड़ा योगदान है.

लखीमपुर खीरी की करीब 40 लाख की आबादी में सिख समुदाय की हिस्सेदारी बहुत कम है. इस पूरे इलाके में दलित और पिछड़े वर्ग के वोटरों का दबदबा है. यहां करीब 4.25 लाख दलित और कीरब पांच लाख ओबीसी वोटर हैं. इलाके में अच्छी खासी संख्या में मस्लिम वोटर भी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे वोटर करीब 3.25 लाख है.

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