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प्राचीन भारत के वैज्ञानिक उपलब्धियों को शामिल कर इतिहास फिर से लिखा जाना चाहिए

नई दिल्‍ली. नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद शर्मा का कहना है कि स्कूलों में मौजूदा सिलेबस में हार का जिक्र बहुत अधिक है. उन्‍होंने कहा है कि नए तथ्यों के संबंध में इतिहास को फिर से लिखा जाना चाहिए और किताबों में शासकों की लड़ाई की भावना के बारे में बात करनी चाहिए. जैसे विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ महाराणा प्रताप ने लड़ाई लड़ी थी.

शर्मा 21 सितंबर को सरकार द्वारा के कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में गठित की गई उस समिति के सदस्य हैं, जो स्कूल पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों के लिए व्यापक दिशानिर्देश निर्धारित करेगी. यह नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क को संशोधित करेगी.

मंगलवार को एनसीएफ का मसौदा तैयार करने वाली 12 सदस्यीय समिति की पहली बैठक हुई. इसमें स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल भी शामिल हुईं. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक ट्वीट में जानकारी दी कि बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के प्रावधानों पर चर्चा हुई.

बुधवार को शर्मा ने कहा, ‘आज इतिहास पढ़ाया जाता है कि हम यहां हार गए, हम वहां हार गए. लेकिन हमें संघर्षों पर चर्चा करने की जरूरत है. लड़ाई के दौरान हम विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ बहादुरी से लड़े. हम उस पर पर्याप्त प्रकाश नहीं डालते हैं.’

उन्‍होंने कहा कि तथ्य यह है कि इतनी सारी लड़ाई केवल इसलिए हुईं क्योंकि उन्होंने इतना मजबूत प्रतिरोध किया. उदाहरण के लिए एक कहानी बनाई गई है कि मुगल सम्राट अकबर ने महाराणा प्रताप को हराया था जबकि तथ्य यह है कि दोनों में कभी आमने-सामने लड़ाई नहीं हुई थी. नए तथ्यों के संबंध में इतिहास को फिर से लिखा जाना चाहिए. या हम यह भी कह सकते हैं कि पाठ्यपुस्तकों में नए तथ्यों को शामिल किया जाना चाहिए. संशोधित पाठ्यक्रम को सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय गौरव को विकसित करने में भी मदद करनी चाहिए.

शर्मा आरएसएस की शिक्षा ईकाई विद्या भारती के पूर्व अध्यक्ष हैं, जो पूरे भारत में स्कूलों की एक श्रृंखला चलाता है. वह इसके केंद्रीय कार्यकारी सदस्य बने हुए हैं. शर्मा इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार की पाठ्यपुस्तक लेखन स्थायी समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं.

शर्मा ने कहा कि समिति ने अपनी पहली बैठक में टेक्‍नोलॉजी, पर्यावरण, भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और संस्कृति में विकास जैसे क्षेत्रों को कवर करने वाले 25 क्षेत्रों पर काम करना शुरू करने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में प्राचीन भारत में वैज्ञानिक उपलब्धियों को भी शामिल किया जाना चाहिए.

 

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