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उत्तर कोरिया ने फिर से दागी बैलेस्टिक मिसाइल

 

प्योंगयांग. उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की हथियारों की सनक हर दिन बढ़ती जा रही है. उत्तर कोरिया ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइल की लॉन्चिंग की है. रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया ने जापान के समुद्री तट के क़रीब पनडुब्बी से एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी. साउथ कोरियाई मिलिट्री ने मंगलवार को ही इसकी जानकारी दी थी. भारतीय समयानुसार ये मिसाइल मंगलवार सुबह करीब 6 बजकर 45 मिनट पर दक्षिण हामग्योंग प्रांत के सिनको के आसपास से पूरब की तरफ लॉन्च किया गया था. ये मिसाइल ईस्ट सी में गिरी, जिसे सी ऑफ़ जापान कहा जाता है.

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि दागी गई मिसाइल 60 किमी की अधिकतम ऊंचाई पर लगभग 450 किमी की दूरी तक गई. हालांकि, अभी तक ये साफ नहीं हुआ है कि मिसाइल को सबमरीन से या पानी के नीचे के प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया गया था. दावा किया जा रहा है कि ये वही मिसाइल है जिसकी तस्वीरें जनवरी में रिलीज की गई थी. तब उत्तर कोरिया ने इसे दुनिया का सबसे ताकतवर हथियार बताया था. दक्षिण कोरिया और अमेरिका की एजेंसियां उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट का एनालिसिस कर रही हैं.

इस बीच उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट से जापान चौकन्ना हो गया है. जापानी कोस्ट गार्ड ने जहाजों के लिए मरीन सेफ्टी अलर्ट जारी किया है. जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने हाल के दिनों में नॉर्थ कोरिया की तरफ से किए जा रहे मिसाइल टेस्ट को अफसोसजनक बताया है.

बता दें कि इससे पहले उत्तर कोरिया ने एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल का भी परीक्षण किया था. सतह से हवा में मार करने वाली ये मिसाइलें दुश्मनों के एयरक्राफ्ट, ड्रोन और मिसाइल को तबाह करने में सक्षम मानी जाती हैं . करीब 6 महीने शांत रहने के बाद उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने तबाही का खेल सितंबर महीने में शुरू किया और फिर एक महीने के भीतर ताबड़तोड़ 4 मिसाइल टेस्ट कर दुनिया को हैरान कर दिया था. इसमें हाइपरसोनिक मिसाइल भी शामिल है. इस वजह से एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ गया है.

माना जा रहा है कि इसके जरिए उत्तर कोरिया अपने पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया पर दबाव बनाना चाहता है, ताकि वो अमेरिका को आर्थिक प्रतिबंधो में ढील और अन्य रियायतें देने के लिए राजी कर पाए. उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने शांति स्थापित करने के लिए अक्टूबर के शुरू में दक्षिण कोरिया के साथ हॉटलाइन बहाल करने की इच्छा जाहिर की, लेकिन उन्होंने बातचीत के अमेरिकी प्रस्ताव को ये कहकर फिर से ठुकरा दिया कि ये उत्तर कोरिया के खिलाफ दुश्मनी को छिपाने के लिए अमेरिका का कुटिल तरीका है.

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