Tuesday , September 6 2022

दुश्मन के खिलाफ ऐसे तैयार हो रही भारतीय सेना

तवांग सेक्टर. चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव के बीच 15 हजार फीट ऊंचे पहाड़ी स्थान पर भारतीय सेना के जवान युद्ध का अभ्यास कर रहे हैं. सैन्य भाषा में कहें तो इस पहाड़ी क्षेत्र को इंटीग्रेटेड डिफेंडेड लोकेलिटी कहा जाता है . 9 अक्टूबर की सुबह यहां तापमान -5 डिग्री सेल्सियस पर है और अगले दो महीनों में पारा -25 डिग्री सेल्सियस पर होगा. युद्ध कौशल को बेहतर करने के लिहाज से की जा रही है इन गतिविधियों में सैनिक जंग की स्थिति तैयार करते हैं और रणभूमि की तरह ही प्रतिक्रिया देते हैं.
भारतीय सेना के रक्षा क्षेत्रों का एक कॉम्बिनेशन है, जिसमें गहरी खाई और पत्थरों के बंकर शामिल हैं. ऐसे प्रत्येक स्थान पर भारतीय सेना की एक कंपनी या 120 जवान तैनात रहते हैं. जवानों का यह युद्ध अभ्यास प्लान 190 के प्रदर्शन का हिस्सा है. इसके तहत सैनिक शरीर को तैयार करने के लिए कठिन और कठोर एक्सरसाइज, अभ्यास और बगैर हथियारों के लड़ने की तकनीक का प्रशिक्षण लेते हैं. LAC के पास मौजूद जवान प्रतिदिन हर तीन घंटे में यह अभ्यास करत हैं. इससे पहले वे 10 मिनट योग और ध्यान करते हैं.

तवांग ब्रिगेट कमांडर ब्रिगेडियर विजय जगताप का कहना है, ‘यह उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ्, मानसिक तौर पर सतर्क रखता है और ऐसे मुश्किल मौसम में ऊंचाई पर युद्ध का सामना करने में मदद करता है.’ जिस पहाड़ पर सैनिकों का अभ्यास जारी है, वह बम ला से महज 10 मिनट की दूरी पर है. बुम ला में भारतीय और चीनी सैन्य कमांडर बैठकें आयोजित करते हैं. अकेले तवांग सेक्टर में ही एक दर्जन से ज्यादा ऐसे रक्षा क्षेत्र हैं.

रक्षा क्षेत्र में हथियारों, गोला-बारूद को रखने के लिए अलग से जगह होती है. साथ ही इसमें निगरानी केंद्र भी होता है, जिसके जरिए एलएसी पर होने वाली छोटी से छोटी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है. इसके अलावा यहां चिकित्सा, खाना पकाने और जवानों के रहने की भी जगह होती है. इसके प्रमुख भारतीय सेना के कंपनी कमांडर यानि मेजर रैंक के अधिकारी होते हैं. इस अधिकारी के पास ही युद्ध करने के साथ-साथ यहां तैनात जवानों की संभावलने की जिम्मेदारी होती है.

यहां सैनिक यह दिखा रहे हैं कि युद्ध कैसे होगा और इस स्थान से उसे कैसे लड़ा जाएगा. इस बंकर में कंपनी कमांडर युद्ध लड़ रहे हैं. कंपनी कमांडर मेजर रूपस जॉनसन का कहना है, ‘आधुनिक दौर के युद्ध की सबसे जरूरी बात युद्धक्षेत्र की पारदर्शिता है. ताकि हर कमांडर युद्ध के दौरान जानकारी हासिल कर सके और समय रहते फैसले ले सके.’

मेजर जॉनसन के बंकर में निगरानी के लिए छोटी स्क्रीन मौजूद है, जो दुश्मन सैनिकों की गतिविधियों को रडार पर दिखाती है. एक बड़ी स्क्रीन पर इलाके की मौजूदा हालात की जानकारी क्वाडकॉप्टर के जरिए मिलती है. उनका कहना है कि सूचना हासिल करने की इन व्यवस्थाओं के अलावा उनके पास प्लाटून भी हैं, जिनका नेतृत्व प्लाटून कमांडर करते हैं. इसके अलावा कुछ टुकड़ियां सेना के रक्षा क्षेत्रों के आगे दुश्मन सैनिकों के लिए माइनफील्ड (विस्फोटक वाले इलाके) तैयार कर रही है. उन्होंने जानकारी दी कि कुछ टुकड़ियां तोपखाने की भी हैं, जो दुश्मनों पर गोले गिराने के लिए कंप्यूटर सै लैस हैं.
ऊचाइंयो पर तैनात जवानों को विशेष रसद पहुंचाई गई है, ताकि उनके स्वास्थ्य पर कोई गलत प्रभाव न पड़े. भारत और चीन के बीच तनाव पूर्वी लद्दाख में जारी है, लेकिन LAC पर जवानों की तैनाती में इजाफा हुआ है. दोनों देशों के बीच जारी तनाव में सेना ने युद्धाभ्यास और प्रशिक्षण तेज कर दिया है. मेजर जॉनसन ने कहा, ‘जंग के दौरान बहुत उथल पुथल होती है. रात में ऐसी स्थिति के बारे में सोचिए. हम इस जंग को अंडरग्राउंड डिफेंस की मदद से लड़ेंगे…’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन यहां होने वाली सारी उथल पुथल के लिए मैं जिम्मेदार हूं और फर्क नहीं पड़ता कि दुश्मन कहां से हमला करेगा, उसके हमले को नाकाम दिया जाएगा.’

 

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