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विपक्षी दल क्यों नहीं घटा रहे पेट्रोल पर टैक्स?


नई दिल्ली:दिवाली से ठीक एक दिन पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाने का ऐलान किया। इसके बाद अब तक देश के 22 राज्यों ने मूल्य वर्धित कर (वैट) में कटौती कर दी है। इनमें से अधिकतर बीजेपी शासित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश हैं। वहीं, कांग्रेस शासित राज्यों में अब भी वैट की कटौती नहीं की गई है। कुल 14 राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में अब तक वैट नहीं कम किए गए हैं। ऐसे में इन राज्यों में सिर्फ केंद्र की ओर से दी गई राहत ही प्रभावी है।

किन राज्यों ने नहीं दी राहत: दिलचस्प ये है कि जिन राज्यों ने वैट पर राहत नहीं दी, उनमें अधिकतर कांग्रेस शासित प्रदेश हैं। ये राज्य महाराष्ट्र, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, मेघालय, अंडमान और निकोबार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पंजाब और राजस्थान हैं।

कर्नाटक में सबसे ज्यादा कटौती: वैट पर राहत की वजह से पेट्रोल की कीमतों में सबसे ज्यादा कमी कर्नाटक में हुई है, इसके बाद पुडुचेरी और मिजोरम का स्थान है। इन राज्यों में पेट्रोल की कीमतों में क्रमश: 13.35 रुपये, 12.85 रुपये और 12.62 रुपये की कमी आई है। डीजल के मामले में भी सबसे अधिक कटौती कर्नाटक द्वारा की गई है। इस वजह से कीमतों में 19.49 रुपये प्रति लीटर की कमी आई है, इसके बाद पुडुचेरी और मिजोरम का स्थान रहा है।

बीजेपी ने की आलोचना: वैट में कटौती नहीं करने पर भाजपा की ओर से विपक्षी दलों की आलोचना की गई है। बीजेपी ने कहा कि विपक्ष पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों को लेकर केंद्र पर हमले कर रहा है, लेकिन जब केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क घटाया तब उन्होंने अपने-अपने शासन वाले राज्यों में वैट क्यों नहीं घटाया। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, ‘‘यदि केंद्र और बीजेपी शासित राज्य लोगों को राहत दे सकते हैं तो फिर कांग्रेस शासित राज्य क्यों नहीं दे सकते?’’ बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित राज्य ‘निर्मम और अक्षम’ हैं।

भाटिया ने कहा कि कांग्रेस शासित राजस्थान में पेट्रोल पर वैट 32.19 रुपये है और यह विपक्षी गठबंधन (महाविकास आघाड़ी) नीत महाराष्ट्र में 31 रुपये हैं, जबकि बीजेपी शासित राज्यों, उत्तर प्रदेश में 21.86 रुपये और उत्तराखंड में 20.46 रुपये है। भाटिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने लोगों से जुटाये गये अतिरिक्त कर का उपयोग राष्ट्र निर्माण और जन कल्याण के लिए किया। उन्होंने कहा कि 19 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नकद अंतरण (डीबीटी) किया गया है और गरीबों को मुफ्त राशन दिया गया।

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