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एफिल टावर के आकार का ऐस्टरॉइड धरती की तरफ ….जानें क्या होगा?


यह ऐस्‍टरॉइड प्रत्‍येक 664 दिन में सूरज का चक्‍कर लगाता है. हालांकि आगे चलकर इसके अब 2 मार्च 2031 को धरती के पास आने की आशंका है. इस ऐस्‍टरॉइड की खोज सबसे पहले अमेरिकी खगोलविद एलेनोर एफ हेलिन ने साल 1982 में की थी. यह ऐस्‍टरॉइड अपोलो समूह का हिस्‍सा है और सूरज के चक्‍कर लगाते समय पृथ्‍वी की कक्षा के पास से गुजरता है.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चेतावनी दी है कि फ्रांस के एफिल टावर के आकार का विशाल ऐस्‍टरॉइड अगले महीने धरती की ओर आ रहा है. नासा ने इस ऐस्‍टराइड को संभावित रूप से खतरनाक ऐस्‍टरॉइड की कैटेगरी में रखा है. इस ऐस्‍टरॉइड का नाम 4660 Nereus है. यह फुटबॉल की पिच से करीब 3 गुना बढ़ा है. इसके धरती से टकराने पर नतीजे भयानक हो सकते हैं, लेकिन अच्‍छी बात यह है कि यह हमारी धरती से काफी दूर से गुजर जाएगा.

नासा ने बताया कि ऐस्‍टरॉइड 39 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा, जो धरती और चंद्रमा के बीच कुल दूरी का 10 गुना है. नासा ने बताया कि 11 दिसंबर को यह ऐस्‍टरॉइड धरती के करीब से गुजर सकता है. ऐस्‍टरॉइड नेरेअस 330 मीटर लंबा है जो इसे 90 फीसदी ऐस्‍टरॉइड से बड़ा बनाता है. हालांकि, इससे भी बड़े-बड़े कई अन्‍य ऐस्‍टरॉइड मौजूद हैं.

यह ऐस्‍टरॉइड प्रत्‍येक 664 दिन में सूरज का चक्‍कर लगाता है. हालांकि आगे चलकर इसके अब 2 मार्च 2031 को धरती के पास आने की आशंका है. इस ऐस्‍टरॉइड की खोज सबसे पहले अमेरिकी खगोलविद एलेनोर एफ हेलिन ने साल 1982 में की थी. यह ऐस्‍टरॉइड अपोलो समूह का हिस्‍सा है और सूरज के चक्‍कर लगाते समय पृथ्‍वी की कक्षा के पास से गुजरता है.

ऐस्टरॉइड्स वे चट्टानें होती हैं, जो किसी ग्रह की तरह ही सूरज के चक्कर काटती हैं, लेकिन ये आकार में ग्रहों से काफी छोटी होती हैं. हमारे सोलर सिस्टम में ज्यादातर ऐस्टरॉइड्स मंगल ग्रह और बृहस्पति यानी मार्स और जूपिटर की कक्षा में ऐस्टरॉइड बेल्ट में पाए जाते हैं.

इसके अलावा भी ये दूसरे ग्रहों की कक्षा में घूमते रहते हैं और ग्रह के साथ ही सूरज का चक्कर काटते हैं. करीब 4.5 अरब साल पहले जब हमारा सोलर सिस्टम बना था, तब गैस और धूल के ऐसे बादल जो किसी ग्रह का आकार नहीं ले पाए और पीछे छूट गए, वही इन चट्टानों यानी ऐस्टरॉइड्स में तब्दील हो गए. यही वजह है कि इनका आकार भी ग्रहों की तरह गोल नहीं होता. कोई भी दो ऐस्टरॉइड एक जैसे नहीं होते हैं.

नासा ने इस नेरेअस को खतरनाक ऐस्‍टरॉइड की श्रेणी में रखा है. नासा इन दिनों दो हजार ऐस्‍टरॉइड पर नजर रखे हुए है जो धरती के लिए खतरा बन सकते हैं. अगर किसी तेज रफ्तार स्पेस ऑब्जेक्ट के धरती से 46.5 लाख मील से करीब आने की संभावना होती है तो उसे स्पेस ऑर्गनाइजेशन्स खतरनाक मानते हैं. NASA का Sentry सिस्टम ऐसे खतरों पर पहले से ही नजर रखता है. इसमें आने वाले 100 सालों के लिए फिलहाल 22 ऐसे ऐस्टरॉइड्स हैं जिनके पृथ्वी से टकराने की थोड़ी सी भी आशंका है.

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