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जानें किस दिन मनाया जाएगा गोपाष्टमी पर्व


गोपाष्टमी पर्व: गोवर्धन पूजा के 8 दिन बाद गोपाष्टमी पर्व मनाया जाता है. यह पर्व भगवान कृष्ण से जुड़ा हुआ है. इस दिन गौ वंश की सेवा कर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है.
मान्यता है कि इंद्र देवता ने नंद गांव के लोगों को पानी में डुबोने के लिए कई दिनों तक घनघोर बारिश की थी. इस दौरान कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक भगवान श्री कृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया था. जिससे इंद्र देवता की बारिश का कोई असर गांव के लोगों पर नहीं पड़ा. आठवें दिन इंद्र देव को अपनी भूल का अहसास हुआ और वे प्रभु श्रीकृष्ण के पास क्षमा मांगने गए. तभी से कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है.

जान लें पूजा का शुभ मुहूर्त
इस बार गोपाष्टमी 2021 का शुभ मुहूर्त ) 12 नवंबर को सुबह 06:49 बजे से शुरू होकर 13 नवंबर को सुबह 05:51 बजे तक रहेगा.

गोपाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठने की कोशिश करें. इसके बाद गायों को गुड़-रोटी आदि देकर उन्हें भोजन कराएं और उनकी सेवा करें. उस दिन गायों की सेवा करने वाले ग्वालों को भी उपहार देकर सम्मान करना चाहिए. शाम को गायों का पूजन करके उन्हें फिर से कुछ खाने के लिए दें. इसके बाद गौमाता के चरणों की मिट्टी को माथे पर लगाकर प्रणाम करें. साथ ही ईश्वर से प्रार्थना करें कि उन्हें गो-सेवा करने का यह अवसर बार-बार मिलता रहे.
हिंदू धर्म में गाय को सबसे पवित्र जीव माना गया है. मान्यता है कि गाय में तमाम देवी-देवताओं का वास होता है. पौराणिक ग्रंथों में कामधेनु का जिक्र मिलता है. माना जाता है कि कामधेनु की उत्पत्ति देवता और असुरों के समुद्र मंथन के दौरान हुई थी. कहा जाता है कि गोपाष्टमी की संध्या पर गाय की पूजा करने वालों को सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है.

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