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80 की उम्र में दादी कर रहीं घुड़सवारी

देवासः एक कहावत है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. मध्य प्रदेश के देवास जिले की दादियों ने ये बात साबित कर दी है. बीते दिनों देवास की 95 साल की एक दादी हाइवे पर कार दौड़ाते नजर आईं थी. उनका वीडियो खूब वायरल हुआ था. अब देवास की ही दो अन्य दादियां भी उम्र को मात देती नजर आ रही हैं. दरअसल एक दादी 80 की उम्र में जहां स्कूटी सीख रही हैं, वहीं दूसरी दादी घुड़सवारी कर रही हैं.

जिस उम्र में लोग बिस्तर पकड़ लेते हैं, उस उम्र में देवास की दादियां कमाल कर रही हैं. दरअसल जिले के बसेरा नामक वृद्धाश्रम में रहने वालीं 75 साल की उम्र में घुड़सवारी कर रही हैं. वहीं 78 साल की शकुंतला गोस्वामी स्कूटी सीख रही हैं. दोनों दादियों का जोश देखकर आश्रम के अन्य बुजुर्ग भी हैरान हैं. बीते दिनों देवास की 95 वर्षीय दादी रेशम बाई तंवर का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह हाइवे पर कार दौड़ाती नजर आ रही हैं. रेशम बाई तंवर का यह वीडियो खूब वायरल हुआ था और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनकी तारीफ की थी.

रेशम बाई तंवर को देखकर ही वृद्धाश्रम में रह रहीं इन दोनों दादियों ने भी तय किया वह अपनी इच्छा पूरी करेंगी और घुड़सवारी और स्कूटी चलाना सीखेंगी. दोनों दादियों ने वृद्धाश्रम प्रबंधन को अपनी इच्छा से वाकिफ कराया. यह वृद्धाश्रम सरकारी सहायता से चलता है. ऐसे में प्रशासन ने भी दादियों की इच्छा पूरी करते हुए घोड़े और स्कूटी का इंतजाम कर दिया. अब दोनों दादियां घुड़सवारी और स्कूटी चलाने का आनंद ले रही हैं. वहीं आश्रम के अन्य लोग तालियां बजाकर दोनों का उत्साहवर्धन कर रहे हैं.

जिस उम्र में लोग खुद को चुका हुआ मान लेते हैं, उस उम्र में देवकी बाई घुड़सवारी कर रही हैं. देवकी बाई ने बताया कि मेरे पिता घोड़ों का काम करते थे, जब मैं छोटी थी तो बहुत घोड़े दौड़ाती थी. उन्हें चारा खिलाना, नहालाना मैं ही करती थी. देवकी बाई ने बताया कि उम्र के अंतिम पड़ाव पर फिर घुड़सवारी करने की इच्छा हो रही है. वह वृद्धाश्रम में ही शान से घोड़ा दौड़ाते नजर आ जाती हैं और अन्य लोग उनके जज्बे की तारीफ करते हैं.

इसी आश्रम की शकुंतला गोस्वामी की उम्र 78 साल है और अब वह स्कूटी चलाना सीख रही हैं. उनका कहना है कि मैं अभी स्कूटी सीख रही हूं. कुछ दिनों बाद जब सीख जाऊंगी तो मैं स्कूटी लेकर बाजार जाऊंगी और हाइवे पर भी स्कूटी दौड़ाऊंगी. शकुंतला गोस्वामी ने बड़ी बात करते हुए कहा कि डरने की आदमी हार जाता है. इसलिए कोई भी काम करने से नहीं डरना चाहिए. वृद्धाश्रम के संचालक भी दादियों के इस जज्बे की तारीफ कर रहे हैं.

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