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दिल्ली की हवा सांस लेने लायक भी नहीं रही


नई दिल्ली:राजधानी दिल्ली में अगले पांच दिनों तक प्रदूषण के प्रकोप से राहत मिलती नहीं दिख रही है। हवा की सुस्त पड़ती रफ्तार के साथ कोहरा प्रदूषण की मुसीबत और बढ़ाएगा। इस दौरान हवा गंभीर या बेहद खराब श्रेणी में रहने की आशंका है। दिल्ली के लोग लगातार नौ दिनों से प्रदूषण से भरी जहरीली हवा में सांस लेने को बाध्य हैं।

दीपावली के बाद से एक भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब वायु गुणवत्ता का स्तर सांस लेने लायक हो। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक शनिवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 437 अंक पर यानी गंभीर श्रेणी में रहा। हालांकि इसमें शुक्रवार की तुलना में 34 अंकों का सुधार हुआ है। शुक्रवार को सूचकांक 471 अंक पर था।

शनिवार दिन के समय हवा की गति बढ़ने से प्रदूषक कणों के बहने की रफ्तार थोड़ी तेज हुई है। इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले पांच दिनों तक सुबह के समय हल्के से मध्यम स्तर का कोहरा देखने को मिल सकता है। इस दौरान हवा की रफ्तार भी सुस्त पड़ने की आशंका है। सुस्त हवा और कोहरा प्रदूषण की समस्या और बढ़ा सकती है। इन दोनों ही कारकों के चलते दिल्ली को फिलहाल जानलेवा प्रदूषण से राहत मिलती नहीं दिख रही है।

दिल्ली के लोग इस समय मानक से साढ़े चार गुना ज्यादा प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं। सीपीसीबी के मुताबिक शनिवार शाम पांच बजे हवा में प्रदूषक कण पीएम-10 की मात्रा 457 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम-2.5 कणों की मात्रा 284 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। मानकों के मुताबिक पीएम-10 की मात्रा 100 और पीएम-2.5 की मात्रा 60 से नीचे होने पर ही उसे स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। इस अनुसार दिल्ली की हवा में अभी साढ़े चार गुने से भी ज्यादा प्रदूषण है।
दिल्ली की हवा 10 दिनों में दूसरी बार आपात स्थिति में पहुंची है। पीएम-10 का स्तर 500 से अधिक और पीएम-2.5 का स्तर 300 से ऊपर होने पर उसे सीवियर प्लस या आपात स्थिति माना जाता है। 12 नवंबर को एक बजे से लेकर 13 नवंबर को तीन बजे तक दिल्ली की हवा इसी स्थिति में थी। दिन के समय हवा की रफ्तार थोड़ा बढ़ने वायु गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ। इससे पहले दीपावली के बाद पांच नवंबर को भी हवा में प्रदूषक कणों की स्थिति इस स्तर पर पहुंची थी।
लगातार दूसरे दिन दिल्ली की हवा में पराली के धुएं से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 30 फीसदी से ऊपर बनी रही। शनिवार के दिन दिल्ली की हवा में पराली के धुएं से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 31 फीसदी रही। एक दिन पहले यानी शुक्रवार के दिन यह हिस्सेदारी 35 फीसदी रही थी।सफर के मुताबिक पंजाब और हरियाणा के खेतों में पराली जलाने की 3157 घटनाएं दर्ज की गई हैं।

सबसे लंबा खिंच रहा है प्रदूषण
इस बार दिल्ली की हवा में गंभीर प्रदूषण वाला समय सबसे लंबा खिंच रहा है। शनिवार नौवां दिन है, जब हवा की गुणवत्ता गंभीर या बेहद खराब श्रेणी में है। इन नौ दिनों में से सात दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के अंक के ऊपर यानी गंभीर श्रेणी में रहा है।

हवा में पराली के धुएं की हिस्सेदारी
05 नवंबर 36 फीसदी 06 नवंबर 41 फीसदी 07 नवंबर 48 फीसदी 08 नवंबर 30 फीसदी 09 नवंबर 27 फीसदी 10 नवंबर 27 फीसदी 11 नवंबर 26 फीसदी 12 नवंबर 35 फीसदी 13 नवंबर 31 फीसदी

भयावह प्रदूषण वाले नौ दिन

05 नवंबर 462 06 नवंबर 434 07 नवंबर 428 08 नवंबर 390 09 नवंबर 404 10 नवंबर 372 11 नवंबर 411 12 नवंबर 471 13 नवंबर 437

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