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अमेरिका में महागरीबी

वाशिंगटन . आपने अमेरिका की अमीरी के कई किस्से सुने होंगे. लेकिन सुपर पॉवर माने जाने वाले अमेरिका की अमीरी की सच्चाई कुछ और ही है. साल 2016 में जब डोनाल्ड ट्रंप पहली बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनने की दौड़ में शामिल थे, तब उन्होंने अमेरिका को फिर से महान बनाएं का नारा दिया था. यानी अमेरिका को फिर से महान बनाने का नारा. अपने इस नारे के दम पर वो चुनाव जीत भी गए और अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति बन गए. डोनाल्ड ट्रंप खुद एक अरबपति कारोबारी रहे हैं, जिनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है, वो एक ऐसे अमेरिका में पैदा हुए जो खुद को आज भी दुनिया की महाशक्ति कहता है, जो दुनिया का सबसे अमीर देश है, जिसके पास पैसों और संसाधनों की कोई कमी नहीं है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें अमेरिका को फिर से महान बनाने का नारा क्यों देना पड़ा ? क्योंकि आज के अमेरिका की सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है.

आकड़ों के मुताबिक, शिशु मृत्यु दर के मामले में अमेरिका दुनिया के 44 बड़े देशों में 34वें नंबर पर है. वहीं, परिवारों की औसत आय के मामले में अमेरिका दुनिया के अमीर 36 देशों में पहले नहीं बल्कि चौथे नंबर पर है. इसके अलावा प्रति एक लाख लोगों पर हत्या के मामले में अमेरिका दुनिया के 230 देशों में 89वें नंबर पर है. अगर स्वास्थय व्यवस्थाओं की बात की जाए तो अमेरिका में इलाज कराना दुनिया के 48 विकसित देशों के मुकाबले सबसे महंगा है.जीवन प्रत्याशा के मामले में अमेरिका दुनिया के 193 देशों में 46वें नंबर पर है. ऐसे ही अगर किसी देश की कुल आबादी में गरीबों की संख्या गिनी जाए तो प्रतिशत के हिसाब से अमेरिका 172 देशों में से 127वें स्थान पर है.

अमेरिका में 17% आबादी है गरीब
अमेरिका की कुल आबादी में गरीबों की हिस्सेदारी साढ़े 12 प्रतिशत है. लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक Covid 19 के बाद से ये संख्या 17 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि आबादी के मामले में अमेरिका से 4 गुना बड़ा देश होने के बावजूद इस समय भारत में करीब 21 फीसद लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं. ये बात अलग है कि अमेरिका और भारत में गरीबी के पैमाने बहुत अलग-अलग है. अमेरिका में साल में 25 लाख रुपये से कम कमाने वाले परिवार को गरीब माना जाता है जबकि भारत के शहरों में साल में 61728 रुपये से कम कमाने वालों को गरीब माना जाता है.

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