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अफ्रीकी देशों की मदद के लिए आगे आया भारत

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है. यह वायरस सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका बोत्सवाना में पाया गया था. कई अफ्रीकी देशों में ओमिक्रॉन संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं. अब अफ्रीका को लेकर भारत सरकार की तरफ से एक बड़ा ऐलान किया गया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ओमिक्रॉन के संक्रमणसे निपटने के लिए अफ्रीकाके प्रभावित देशों का समर्थन करने के लिए तैयार है. भारत सरकार मेड इन इंडिया टीकों की आपूर्ति के लिए तैयार है.

ओमिक्रॉन सामने आने के बाद दुनिया भर के अधिकतर देशों ने दक्षिण अफ्रीका से किनारा करते हुए प्रतिबंध लगा दिया है. अब भारत सरकार ने अफ्रीकी देशों की मदद करने के लिए हाथ बढ़ाया है. विदेश मंत्रालय ने जानकारी देते हुए सोमवार को कहा कि “अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो ओमिक्रॉन से निपटने के लिए भारत अफ्रीकी देशों की मदद करेगा. इसके लिए भारत आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं, परीक्षण किट, दस्ताने, पीपीई किट और वेंटिलेटर जैसे मेडिकल उपकरण की आपूर्ति करने के लिए तैयार है.” विदेश मंत्रालय की तरफ से बताया कि अगर जरूरत पड़ी को वायरस पर शोध उसके लक्षण को समझने के लिए भारतीय संस्थान अपने अफ्रीकी समकक्षों की सहयोग करने पर भी विचार करेंगे.

गौरतलब है कि ओमिक्रॉन का सबसे पहले मामला अफ्रीका से सामने आया था. अब तक कुल 15 से अधिक देशों से ओमिक्रॉन के मामले सामने आ चुके हैं. विशेषज्ञों की मानें तो कोविड का यह नया वेरिएंट कोरोना के अब तक सबसे घातक वेरिएंट हैं. कोविड का डेल्टा वेरिएंट जितने लोगों को 100 में इंफेक्टेड करता है ओमिक्रॉन उतने लोगों को मात्र 15 में ही संक्रमित कर देता है.

बता दें कि ओमिक्रॉन वायरस को लेकर हर देश सतर्कता बरता रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से भी इसे लेकर चिंता जाहिर की गई है. डब्ल्यूएचओ ने इसे वेरिएंट ऑफ कंसर्न कहा है. कोविड के नए वेरिएंट को लेकर कहा गया है कि अगर यह फैलता है तो इस बार इसके परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं. ओमिक्रॉन के सामने आने के बाद अब सभी देश दोबारा अपने यात्रा नियमों की समीक्षा कर रहे हैं. अधिकांश देशों ने दक्षिण अफ्रीका से आने वाले यात्रियों के लिए क्वारंटीन अनिवार्य कर दिया है.

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