Wednesday , August 31 2022

सरकार चलाने में तालिबान के छूटे पसीने,

काबुल. अफगानिस्तान में जंग जीतने के बाद तालिबान की सत्ता में वापसी तो हुई है, मगर युद्धग्रस्त मुल्क में शासन चलाने में चरमपंथी संगठन के पसीने छूट रहे हैं. तालिबान और यूरोपियन यूनियन के अधिकारियों के बीच पिछले सप्ताहांत में बातचीत हुई. इस दौरान तालिबान ने अफगानिस्तान के एयरपोर्ट्स को चालू रखने के लिए यूरोपियन यूनियन से मदद मांगी. वहीं, इस बैठक के दौरान यूरोपियन यूनियन के अधिकारियों ने युद्धग्रस्त मुल्क में जारी मानवीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई.

दोनों पक्षों ने वरिष्ठ अधिकारियों को वार्ता के लिए कतर की राजधानी दोहा भेजा. ये वार्ता सोमवार से शुरू होने वाली अमेरिका और तालिबान के बीच दो हफ्ते की वार्ता से ठीक पहले हुई. तालिबान-अमेरिका की वार्ता भी दोहा में ही होने वाली है. यूरोपियन यूनियन की एक्सटर्नल एक्शन सर्विस ने अपने बयान में कहा, ‘वार्ता का मतलब यूरोपियन यूनियन द्वारा तालिबान की अंतरिम सरकार को मान्यता देना नहीं है. लेकिन यूरोपियन यूनियन और अफगान लोगों के हित में यूरोपियन यूनियन के परिचालन जुड़ाव का हिस्सा है.’ गौरतलब है कि तालिबान अपनी सरकार को मान्यता दिलवाना चाहता है.

तालिबान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरिम विदेश मंत्री अमीर खान मुताकी ने किया था. उनके साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के अंतरिम मंत्री, केंद्रीय बैंक के कार्यवाहक गवर्नर और विदेश, वित्त और आंतरिक मंत्रालयों और खुफिया निदेशालय के अधिकारी थे. यूरोपियन यूनियन का नेतृत्व अफगानिस्तान के लिए यूरोपीय यूनियन के विशेष दूत टॉमस निकलासन ने किया था. इसमें EEAS और मानवीय सहायता, अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और प्रवासन का जिम्मा संभालने वाले यूरोपियन कमीशन के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया था.

यूरोपियन यूनियन के बयान में कहा गया कि तालिबान ने उन अफगानों के लिए माफी के अपने वादे पर कायम रहने की प्रतिबद्धता जताई, जिन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ पश्चिम समर्थित सरकार के दौरान तालिबान के खिलाफ काम किया. बयान में कहा गया कि सर्दियों के आगमन के साथ ही दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान में बिगड़ती मानवीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की. इसमें कहा गया कि यूरोपियन यूनियन ने मानवीय सहायता मुहैया कराने की प्रतिबद्धता जताई है. यूरोपियन यूनियन ने तालिबान पर समावेशी सरकार बनाने के लिए दबाव भी डाला. इसने लड़कियों की शिक्षा पर भी जोर डाला.

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