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पाकिस्तान के ‘मरी’ होटल मालिकों की लालच ने 23 लोगों की ली जान

इस्लामाबाद पाकिस्तान का मशहूर हिल स्टेशन.. ‘मरी’ आज कल चर्चा में है. हाल ही में इस हिल स्टेशन पर ज़बरदस्त बर्फबारी हुई थी. बड़ी संख्या में पर्यटक मौसम का आनंद लेने के लिए वहां पहुंचे हुए थे. लेकिन इस दौरान अचानक मौसम ख़राब हो गया. और लोगों को सिर छिपाने के लिए जगह नहीं मिली. और 23 लोग अपनी गाड़ियों में बैठे-बैठे ठंड से मर गए. लेकिन अब ये पता चला है कि इन लोगों ने वहां Hotel वालों से शरण मांगी थी, लेकिन वहां के Hotel मालिकों ने लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने के लिए.. एक कमरे का एक रात का किराया.. 50 से 70 हज़ार रुपये कर दिया. और पैसा कमाने के लालच में इन लोगों को मरने के लिए ही बाहर छोड़ दिया. इस दुर्घटना की सामने आई कुछ तस्वीरें आपको विचलित कर देंगी. इन तस्वीरों में आपको इंसानियत मरी हुई नज़र आएगी. इससे आपको समझ आएगा कि कोई भी त्रासदी या आपदा इंसानों के लालच से खतरनाक नहीं होती. लालच अगर चाहे तो वो कई लोगों को भयानक मौत दे सकती है.

‘मरी..’ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 30 किलोमीटर दूर.. पीर पंजाल की पहाड़ियों पर स्थित एक मशहूर Hill Station है. ये इलाक़ा समुद्र तल से लगभग साढ़े सात हज़ार फीट की ऊंचाई पर है. और जनवरी के महीने में यहां हर साल भारी बर्फ़बारी होती है. और 7 जनवरी को भी यहां ऐसा ही हुआ. इस दिन यहां लगातार कई घंटों तक बर्फबारी हुई और सड़कों पर चार से पांच फीट तक बर्फ जम गई. इससे रास्ते बन्द हो गए और लगभग 25 हज़ार गाड़ियों में 50 हज़ार से ज्यादा लोग कैद होकर रह गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में थे. जिस समय ये लोग गाड़ियों में थे, उस समय बाहर तापमान मायनस 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था.

जिन लोगों के पास पैसा था, वो तो किसी तरह अपनी गाड़ियों को रास्ते में ही छोड़ कर Hotels में पहुंच गए. लेकिन जिन लोगों ने ये सोचा कि वो रातभर गाड़ी में ही रह कर बर्फ़बारी के रुकने का इंतज़ार करेंगे, उनके लिए स्थिति ख़तरनाक हो गई. ऐसे लगभग 23 लोगों ने सुबह होते होते अपनी जान गंवा दी. हालांकि हमें लगता है कि इन लोगों की मौत ठंड और बर्फ़बारी से नहीं हुई. बल्कि इन लोगों की जान लालच ने ली है.

लोगों को मजबूरी में देख कर इस हिल स्टेशन पर मौजूद सभी होटेल मालिकों ने.. एक कमरे का एक रात का किराया, 50 से 70 हज़ार रुपये कर दिया. यही नहीं जिन लोगों की गाड़ियां बर्फ़बारी के बीच फंसी थी, उन गाड़ियों को निकालने के लिए पांच से 10 हज़ार रुपये तक मागे गए. लोगों को पानी की एक बोतल खरीदने के लिए 200 रुपये तक देने पड़े. और जिन लोगों के पास इतना पैसा नहीं था, वो इस बर्फबारी के बीच फंस कर रह गए और उनकी मौत हो गई. लालच का जन्म तब होता है, जब इंसानियत मर जाती है. इसलिए आप कह सकते हैं कि पाकिस्तान में उस दिन इंसानियत मर गई थी.

लालच का संक्रमण किसी एक देश तक सीमित नहीं है. आज पाकिस्तान में जो कुछ भी हुआ है, वो भारत और दुनिया के दूसरे देशों में भी हो सकता है. और कई बार ऐसा हुआ भी है. आपको याद होगा, जब पिछले साल भारत में कोविड की दूसरी लहर के समय मृत्यु काल चल रहा था, तब सब्जियों से लेकर ज़रूरी दवाइयों तक की कालाबाज़ारी और जमाखोरी शुरू हो गई थी. उस समय आपके बीच रहने वाले ही कुछ लोग.. आपकी मजबूरी का फायदा उठा रहे थे. महात्मा गांधी ने एक बार कहा था कि ये दुनिया हर इंसान की ज़रूरत के लिए काफ़ी है. लेकिन किसी एक इंसान के लालच के लिए ये पूरी दुनिया कभी काफ़ी नहीं हो सकती. और भगवद् गीता में भी नरक के जो तीन द्वार बताए गए हैं, उनमें एक द्वार लालच ही है.

हालांकि अब मरी’में पाकिस्तान की सेना को तैनात कर दिया गया है और लगभग 23 हज़ार गाड़ियां वहां से निकाली जा चुकी है. पाकिस्तान सरकार के मुताबिक़ एक हज़ार गाड़ियां और पांच हज़ार लोग अब भी वहां फंसे हो सकते हैं. हालांकि इस घटना पर पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कैसे लोगों का मजाक उड़ाया है, वो भी आपको सुनना चाहिए. उनका कहना है कि अगर लोगों को जिंदा रहना है तो वो घर पर रहें, इतना खर्चा करने की बज़ाए, बर्फ का लुत्फ उठाना ही चाहते हैं तो घर पर ही लोग बर्फ स्प्रे खरीदें और एक-दूसरे पर स्प्रे कर लें, हर चीज के लिए प्रशासन नहीं है.

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