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आप भी नकली चाय तो नहीं पी रहे?

नई दिल्ली: अब हम चाय के शौकीन लोगों के लिए एक शॉकिंग विश्लेषण करेंगे. वैसे तो अभी आप में से ज्यादातर लोग DNA देखने के बाद सोने चले जाएंगे और हमें उम्मीद है कि इस दौरान आपने रात का खाना भी खा लिया होगा. लेकिन आज हम आपसे चाय पर कुछ जरूरी चर्चा करना चाहते हैं. एक नई स्टडी के मुताबिक जो चाय आप ताजगी के लिए पीते हैं. उस चाय से कैंसर जैसी गम्भीर बीमारियां हो सकती हैं.

चाय पीने वाले हो जाएं सावधान!
भारत सरकार के Tea Board of India ने एक एडवाइजरी जारी करके मिलावटी चाय पत्ती से लोगों को सावधान रहने के लिए कहा है. भारत के 80 प्रतिशत परिवारों में दूध वाली चाय पीने का चलन है. दूध में तो मिलावट की खबरें आप सुनते ही रहते हैं लेकिन चाय पत्ती में मिलावट हैरान करने वाली है.

असली चाय की पहचान उसकी पत्तियों, रंग और खूशबू से होती है. लेकिन उत्पादन के दौरान चाय की जो पत्तियां खराब हो जाती हैं, उन्हें इस्तेमाल करने के लायक नहीं माना जाता. ऐसी स्थिति में चाय की खराब पत्तियों को खूशबूदार बनाने के लिए और उसका रंग बदलने के लिए Synthetic Colors और केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसको लेकर Food Safety and Standards Authority of India यानी FSSAI ने कड़े नियम बनाए हुए हैं.

लिवर और किडनी को खतरा
इन नियमों के तहत चाय पत्ती को कुल 34 पैमानों पर खरा उतरना होता है. इस दौरान चाय पत्ती में अगर किसी भी तरह के Synthetic Colors और केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, तो ये मिलावटी चाय पत्ती आपको गम्भीर बीमारियां दे सकती है.

इससे Hypertension का खतरा रहता है. अगर कोई दिनभर में 10 कप मिलावटी चाय पीता है तो उसके लिवर और किडनी को नुकसान पहुंच सकता है. इसके अलावा मिलावटी चाय से कैंसर की बीमारी भी हो सकती है.

पानी के बाद चाय पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पिया जाने वाला पेय पदार्थ है. चीन के महान दार्शनिक लाओ त्सू ने चाय को जीवन का अमृत बताया था. लेकिन इस स्टडी से पता चलता है कि अब चाय भी शुद्ध नहीं रह गई है. इसलिए अगर आप भी सिर दर्द होने पर या मूड खराब होने पर ऐसा सोचते हैं कि एक कप चाय आपको ठीक कर देगी तो आप गलत भी हो सकते हैं. क्योंकि जिस चाय को कई समस्याओं की वैक्सीन माना जाता है, अब उस चाय पत्ती में भी मिलावट हो चुकी है.

अगर इन लोगों की तरह आप भी चाय पीना पसंद करते हैं, तो आपको मिलावटी चाय पत्ती से सावधान हो जाना चाहिए. क्योंकि मिलावटी चाय पत्ती आपके शरीर को कैंसर जैसी बीमारियों का Return Gift दे सकती है.

भारत में 80 प्रतिशत लोग सुबह उठने के बाद या सुबह नाश्ते के दौरान एक कप चाय जरूर पीते हैं. एक और सर्वे के मुताबिक भारत में हर 10 में 7 लोग मानते हैं कि वो दिन में दो कप से ज्यादा पीते हैं. लेकिन इन लोगों के लिए ये कल्पना करना भी मुश्किल है कि जिस चाय को वो अपनी हर समस्या का समाधान समझ रहे हैं, वो चाय पत्ती उन्हें बहुत बीमार बना सकती है.

चाय भारत के लोगों की जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा है, ज्यादातर लोगों की सुबह की शुरुआत एक प्याली चाय के साथ होती है और शाम का स्वागत भी चाय के साथ ही होता है. जब आप किसी के घर जाते हैं तो सामने वाला प्यार से पूछता है, एक एक चाय हो जाए और अगर ऐसा ना हो तो लोग बुरा मान जाते हैं और कहते हैं कि उनसे तो एक कप चाय तक नहीं पूछी गई. लेकिन सोचिए, अगर आपको पता चले कि आप मिलावटी चाय पी रहे हैं तो क्या होगा?

असली और मिलावटी चाय पत्ती की पहचान करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. आप कुछ बातों को ध्यान रख कर खुद मिलावटी चाय पत्ती से बचा सकते हैं. अगर आप चाय पीते हैं और कोई आपसे ये कहे कि वो आज आपको चाय बना कर पिलाएगा तो शायद आप मना नहीं कर पाएंगे. भारत में बहुत सारे लोगों के लिए चाय को मना कर पाना आसान नहीं होता. लेकिन अगर आपको इस खतरे से बचना है तो आपको असली और मिलावटी चाय पत्ती में अंतर करने की आदत बना लेनी चाहिए क्योंकि यही आदत आपको कई बीमारियों से बचाएगी.

माना जाता है कि चाय की खोज करीब 5 हजार वर्ष पहले चीन में हुई थी. तब चीन के इतिहास के दूसरे सम्राट शेन नोंग अपनी सेना के साथ किसी दूर दराज के इलाके में कुछ देर के लिए रुके. उन्हें पानी को उबालकर पीने की आदत थी. जब उनके नौकर उनके लिए पानी उबाल रहे थे, तभी पास ही मौजूद एक पेड़ से कुछ पत्तियां उस पानी में गिर गईं और पानी का रंग भूरा हो गया. लेकिन जब सम्राट ने इसे उबला हुआ पानी समझकर पिया तो उन्हें इसका स्वाद बहुत पसंद आया और उन्हें बहुत ताजगी महसूस हुई. कहा जाता है कि यहीं से चीन में चाय बनाने की परंपरा शुरू हुई, चीन में इसे चा कहा जाता था.

आज चाय के उत्पादन के मामले में भारत पूरी दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है. भारत में दार्जिलिंग चाय की एक किस्म की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है. कहा जाता है कि भारत में चाय का प्रवेश सैकड़ों वर्ष पहले सिल्क रूट के जरिए हुआ था. लेकिन औपचारिक तौर पर भारत के लोगों का चाय से परिचय कराने का श्रेय अंग्रेजों को जाता है.

अंग्रेजों ने ही सबसे पहले 1830 के दशक में भारत में चाय के बागान लगाने की शुरुआत की थी. लेकिन ये भी एक तथ्य है कि 16वीं शताब्दी तक पश्चिम के देशों ने चाय देखी तक नहीं थी, 17वीं और 18वीं शताब्दी में यूरोप के लोगों का परिचय चाय से हुआ. लेकिन तब यूरोप के लोगों के लिए चाय बहुत महंगी हुआ करती थी और इसकी तस्करी करके इसे यूरोप के देशों तक पहुंचाया जाता था.

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