अपने शीर्ष उच्च अधिकारियों के निर्देश भी नहीं मानती जनपद उन्नाव की पुलिस

मुकदमा नंबर 889/2025 पुलिस विभाग के लिए बना नज़ीर। गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमे की विवेचना की समय सीमा को तिरंजलि दी जाती है। विवेचना के नाम पर यह कहकर कि पूरे सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं जबकि सारे सबूत सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है।

सस्पेंस केसो पर यह शब्द तो ठीक लगता है परंतु जहां पंजीकृत मुकदमे पर प्रार्थी द्वारा लगाए गए आरोप स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर अंकित है व प्रत्यक्ष सबूत देखे जा सकते हैं। सबूत नाम के चोले में होता है बड़ा खेल आरोपियों को खुलेआम छूट दे दी जाती है।

मुकदमा पंजीकृत होने के उपरांत लगभग 1 वर्ष होने तक भी कोई उचित कार्रवाई नहीं की जाती है।

आरोपियों के हौसले बुलंद
मुकदमा वापस व जान माल तथा ऊपर तक पहुंच बताते फर्जी मुकदमे फसाने की खुलेआम प्रार्थी को धमकी देते हैं।

आम नागरिक का जनपद उन्नाव पुलिस पर से विश्वास खत्म होता दिख रहा है। क्योंकि– पुलिस पस्त अपराधी मस्त

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