सरकारी अभिलेखों व पत्रावलियों पर साफ दिख रहा है मंडराता खतरा, बनिया की दुकान का बहारन, सुनार की दुकान का कूड़ा, कहावत को गलत ठहरा दिया, तहसील के कचरे ने, जिला उन्नाव आज से कई वर्षों पूर्व पुराने लोगों द्वारा कही गई कहावत की बनिया की दुकान की बहारन से ज्यादा महंगा सुनार की दुकान का कूड़ा होता है लेकिन वर्तमान समय में ऐसा नहीं है सुनार की दुकान के कूड़े से महंगा तहसील का कचरा है जहां इस सत्य को प्रमाणित करते हैं दिनभर वहां मरणा रहे कबाड़ी ‌,कूड़ा बीनने वाले क्योंकि जनपद की शहर तहसील में जहां दिन भर भू माफियाओं व दलालों का जमवाड़ा देखने को मिलता है जिसके चलते उक्त लोगों द्वारा तहसील में उपस्थित कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारी जिनकी गिनती माफियाओ व दलालों के लिए उनके नुमाइंदों में गिनती आती है इन नुमाइंदों के लिए इन दलालों द्वारा महंगी से महंगी खानपान की वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती है जिनकी पैकिंग ही इतनी कॉस्टली होती है वह चाहे बॉक्स हो या बोतल,कैन, आदि 2000से4000 पीने वाली कोई साधारण पैकिंग में तो आएंगी नहीं जो खाली होने पर कचरा समझ कर फेंक दी जाती है जिनको बिनने के लिए अलग-अलग कबाड़ीयो ने अपना समय निर्धारित कर रखा है जो की सुबह दोपहर शाम चक्कर लगाया करते हैं क्योंकि खपत इतनी ज्यादा है इस राजस्व के मंदिर से यह कबाड़ी खाली हाथ व झोली नहीं बोरी भरकर ले जाते हैं जिसका सबूत यह चित्र है इन बोरियों को देखकर सरकारी अभिलेख व पत्रावलियों पर भी खतरा मंडराता साफ दिख रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *